अजीत कुमार झा

अजीत कुमार झा

गोवराही, दुहबी-6, धनुषा, कनकपुर नेपाल। सम्प्रति, हानवेल, यूके.मे अध्ययन


काका काकी दहेज लेलथि

कक्का भोरे बिदा भेलाह

जीट-जाट आ कान्हि छटा

पुछलहुँ कक्का एना कतए

कहल जे जाइ काल टोक नञि ने

अबए छी कने बजार भेने

मीठ पकवान आ मिठाई नेने

एम्हर काकी घरकेँ नीपल

सर सफाई कका चमका रहल

कोन अवसर जे एना भकी रहल

पुछलहुँ जे काकीसँ कहलनि

बौआ आइ घटक आबि रहल

 

अच्छा तँ दोकानक सजावट छी ई

ग्राहकक स्वागतक तैयारी छी ई

सभ किछु आइ नव तेँ लागि रहल

भाइजीयोक मुँह चमकि रहल

कान्हि छटाककेश रँगा क

पान चबाबैत कुर्तामे बान्हल

जतेक बढ़िया समान ततबे बढ़िया दाम

बनीमाक राज कक्काकखूब नीकसँ बुझल

 


घटक जी अएला निहारि कदेखला

ठोकि बजा कसभ किछु परखला

भाइजीपर ओफेर बोली लगेलथि

मोल तोल केखूब भेल घमर्थन

सवा चारि लाखमे भेल बात पक्का

देखू आजु हम्मर भैप्‍या बिकेलथि

लागनिक सूद-मूर सभ उप्पर भेलन्हि

जमा-पूँजीकेँ खूब नीकसँ भजओलथि

कक्का काकी आइ हमर दहेज लेलथि

निमुख बरद जेकाँ भैय्या बिकेलथि

कक्का काकी आइ हमर दहेज लेलथि

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