अमरेन्द्र यादव

अमरेन्‍द्र यादव
(दिघवा, सप्तरी)
तीनटा कविता



आत्‍मा



डाक्‍टर सूर्यनाथ गोप
मैथिलीकेँ बेचिकऽ
पैन्‍ट सर्टपर टाईकोट कसिकऽ
माथपर ढाका टोपी चढाकऽ
बगलमे भारतीय दुतावासक झोरा लटकाकऽ
एहि युगक सभसँ बडका विसंगति–
डाक्‍टर सूर्यनाथ गोप
एक हाथमे पासपोर्ट–भिसा मुठियबैत
दोसर हाथमे हिन्‍दीक झण्‍डा फहरबैत
हिनहिनाईत
गिनगिनाईत
जारहल छथि
मौरिसस
अन्‍तर्राष्‍ट्रिय हिन्‍दी सम्‍मेलनमे।



हमर मैथिली



डाक्‍टर चन्‍देश्‍वरजी,
अहाँक बाबूजी पियौने हेथिन्‍ह
उठौना दूध
अहाँकेँ पोसने हेथिन्‍ह भाड़ापरक माए
लेकिन हमरा नओ महिनाधरि गर्भमे
मैथिलीए केलखिन्‍ह सम्‍हार
सोइरी घरमे सेहो मैथिलीए केलखिन्‍ह दुलार
हम कनियाँक स्‍पर्श विना जीबि सकैत छी
हस्‍थमैथुनक उत्‍कर्ष विना जीबि सकैत छी
लेकिन मैथिलीक आकाश विना नहि
मैथिलीक श्‍वासप्रश्‍वास विना नहि
डाक्‍टर चन्‍देश्‍वरजी,
हमर खाँडो, खुट्टी आ बलानमे बहैत अछि मैथिली ।
हमर दिनाभदरी आ सलहेशक दलानमे रहैत अछि मैथिली।


कल्‍पना आ यथार्थ


जिनगीक हड़हड़ खटखटसँ दूर
मृत्‍युक तगेदासँ अन्‍जान बनल
जिनगीक अति व्‍यस्‍त समयसँ
किछ पलखति चोराकऽ
अहाँक यादक उडनखटोलामे
उडि जाइ छी हम
प्रेमक अन्‍तरिक्षमे।
नदीक ओहि पार
दू गछिया तऽर
हमर कोरामे औङ्गठल
हमरासँग हँसैत बजैत
खाइत छी अहाँ सप्‍पत
खाइत छी हमहूँ सप्‍पत
अहाँक तरहत्‍थीकेँ चुमिकऽ
खोसि दैत छी हम
एकटा गेनाक फूल
अहाँक खोपामे।
तखने हमर नाकमे अचानक
ढकैत अछि जरल तरकारीक गन्‍ध
आ अकचकाइत उठैत छी हम
मिझबय लेल स्‍टोभ
तखने हमर नजरि पडैत अछि
टेबुलपर राखल चिट्ठीपर
जे काल्‍हिए एलै हमर गामसँ
आ हमर आगा नाचय लगैत अछि
भरना लागल खेत
बाबूक फाटल बेमाय
बहिनक कुमारि सींथ
भायक पढाइ खर्च
आ मायक दम्‍मा बेमारी।

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